(परमसंत भीखा साहिब जी)
v भीखा भूखा कोई नहीं, सबकी गठड़ी लाल|
गांठ खोलि
जानत नहीं, या विधि भये कंगाल||
भीखा साहिब जी स्वयं को सम्बोधित करते हुए कथन करते
हैं- ओ भीखा! इस संसार में कोई भी निर्धन नहीं है प्रत्येक की गठड़ी में लाल है,
परन्तु गठड़ी की गांठ कैसे खोलनी है, यह नहीं जानते और इसलिए वह निर्धन ही रह जाते
हैं|
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