(परमसंत संत जगजीवन जी)
v सत समरथ ते राखि मन, करिय जगत को काम |
जग जीवन
यह मन्त्र है, सदा सुख बिसराम ||
इस दुनिया में रहकर दुनिया के काम-धंधे और जीवन
निर्वाह बेशक करो, परन्तु अपना मन सत् समरथ रूप सच्चे मालिक और सतगुरु से लगा रखो|
मन को मायावी धंधो में मत अटकाओ| संत जगजीवन दास जी उपदेश फरमाते हैं कि यही
दुनिया में हर तरह से सुख-शन्ति पाने का उत्तम मन्त्र है|
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