Wednesday, April 29, 2020

परम संत नारायण जी (दोहावली)


(परम संत नारायण जी)

v  नारायण जब अंत में, यम पकड़ेंगे बाहि|
  उनसे भी कहियो जरा, अभी तो फुरसत नाहिं||

v  दो बातो को भूल मत, जो चाहे कल्याण|
  नारायण एक मौत को, दूजे श्री भगवान||

v  नर संसारी लगन में दुख सुख सहै करोड़ |
   नारायण हरि भजन में, जो आवे सो थोड़ ||

vनारायण जप योग तप सब तो प्रेम प्रवीण।
   प्रेम हरि को करत है प्रेमी के आधीन।।

v नारायण हरि लगन मेंये पांचों न सुहात।
विषयभोग निद्रा हंसीजगत प्रीत बहु बात।।
अर्थः-फरमाते हैं कि ऐ जिज्ञासु! यदि भक्ति मार्ग में उन्नति करनी है तो पांच चीज़ों से सख़्त परहेज़ करना होगा। 1.-विषयभोग-विषय भोगों से मनुष्य रोगी बनता है। भक्तिमान को तो योगी बनना हैइसलिये विषयभोग से परहेज़ करो। 2. अधिक नींद से भी परहेज़ रखोक्योंकि सोये सो खोयेजागे सो पाये। सोने से सुस्ती और जागने से चुस्ती आती है। श्रुती में वर्णन आया है कि सुस्त व्यक्ति आत्मोन्नति नहीं कर सकता। 3. हँसी-ठट्ठे की आदत से बचो-आम कहावत है कि बीमारी का मूल खांसी और लड़ाई का मूल हांसी। हंसी-मज़ाक में ही द्रौपदी ने दुर्योधन से कहा था कि अन्धे की अन्धी सन्तान। उस हंसी-मज़ाक का परिणाम कितना भयानक निकला    ? इस बुरी आदत से परहेज़ करो। 4. जगत-प्रीत को दिल से हटा दो-सत्पुरुषों ने भी फरमाया है कि जगत मैं झूठी देखी प्रीति। संसार में सब स्वार्थ के साथी हैंइसलिये भक्तिमान को संसारियों के प्यार से परहेज़ रखना चाहिये। 5. बहुबात-बहुत बोलने या व्यर्थ बोलने से मनुष्य अपनी आत्मिक शक्ति को व्यर्थ व्यय करता रहता है। जहां तक हो सके चुप रहने की आदत बनानी चाहिये। आवश्यकता के समय कम से कम शब्द बोलने चाहिये।

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