(परमसंत दरिया साहिब जी, मारवाड़ वाले)
v डूबत रहा भव सिन्ध में, लोभ मोह की धार |
दरिया गुरु तैरु मिला, कर दिया
पैले पार |
अतएव सन्त महापुरूष भवसागर के मांझी बनकर अवतरित
होते हैं| सांसारिक दुखों से छुटकारा दिलाकर मानसिक प्रसन्ता प्रदान करते हैं,
आवागमन के चक्र से छुडाते हैं| इसलिए सन्त सत्पुरुषो की नितांत आवश्यकता होती है|
*****
No comments:
Post a Comment