Monday, March 9, 2020

सार वस्तु

 

सार वस्तु


सार वस्तु है जगत में, पावन हरि का नाम |

नाम हरि का सिमरते, पूरण हो सब काम ||

 

वेदों में ग्रंथों में हरि नाम की अन्नत महिमा का बखान किया गया है| हरि का सुमिरण ही सार वस्तु है जिसे पाने के लिए मानुष तन प्राप्त होता है इसी नाम सुमिरन के लिए इंसान संसार में अता है और जब संसार से जब जाता है तो जितना सुमिरन का धन इंसान ने  इकठ्ठा किया वही उसके साथ जाता है गुरुवाणी में भी वचन है कि

 

साथि न चालै बिन भजन, बिखिआ सगली छार |
हरि-हरि नाम कमावना, नानक ऐहो धन सार ||

 

गुरबाणी की इन पंक्तियों द्वारा पांचवें गुरु श्री गुरु अर्जुन देव जी मानव मन को समझाते हुए फरमा रहे हैं कि प्रभु सिमरन बंदगी कर जो साचा धन हम इकट्ठा करेंगे वही हमारा साथ जाने वाला है बाकी सारा धन यहीं का यहीं धरा रह जाने वाला है। इसलिए प्रत्येक इंसान को चाहिए कि वह प्रभु परमात्मा की सर्वश्रेष्ठ कृति मानव जन्म पाकर उसका संपूर्ण लाभ उठाते हुए प्रभु सिमरन बंदगी में मन रमावें। मानव जीवन पाने की असली मनोरथ भी यही है।

एक बार भगवान शिवजी माता पार्वती कैलाश पर्वत पर बैठे हुए थे| माता ने देखा कि भगवान शंकर हर थोड़ी-थोड़ी देर बाद हाथ जोड़ कर किसी को प्रणाम कर रहे है, तो माता के मन में प्रश्न उठा कि प्रभु आप थोड़ी -2 देर के बाद हाथ जोड़ कर किसे प्रणाम कर रहे है| तब प्रभु ने फ़रमाया कि जो एक बार मेरे प्रभु श्री राम का दिल से नाम लेता है मैं उसे हाथ जोड़कर प्रणाम करता हूँ तब माता ने पूछा कि आप शमशान में जाकर लोगो की राख को अपने शरीर पर क्यूँ लगाते हो तब प्रभु ने फ़रमाया कि जब जीव संसार से जाता है, तब उस जीवात्मा को लोग कंधे पर उठाकर ले कर जाते है| तो लोग राम नाम का उच्चारण अपने मुख से करते है उस मृतक शरीर के करण ही लोग राम नाम उच्चारण करते है जिस शरीर की वजह से लोगो ने मेरे ईष्ट श्री राम का नाम जपा है, वह शरीर मुझे प्रिय है और तभी मैं उसकी राख को अपने शरीर पर लगाता हूँ कहने का भाव यह है कि इस हरि नाम की कैसी अनोखी महिमा है जिसका वर्णन कर पाना बहुत ही कठिन है इसी हरि नाम को जपकर हनुमान जी ने बड़े से बड़े काम किये| वो जैसे ही कहते “जय श्री राम” उनके सारे काम हो जाते| आपने रामायण में भी देखा और सुना होगा कि हनुमान जी श्री राम जी का नाम लेकर आकाश में उड़ जाते थे अब विचारने वाली बात ये है कि जिस राम का नाम जपकर हनुमान जी ने बड़े से बड़ा काम किया तो क्या आज राम के नाम की शक्ति ख़त्म हो गई है? हम राम का नाम भी जपते है और काम भी नहीं बनते बात सिर्फ इतनी है कि जिस श्रद्धा से और विशवास के साथ हनुमान जी नाम जपते है वह विश्वास और श्रद्धा हमारे अन्दर नहीं है हम मुख से तो राम-राम करते है लेकिन मन से राम नाम के प्रति प्रेम नहीं है दिखावे के लिए तो नाम जपते है लेकिन असल में आतंरिक रूप से हमें नाम जपने में कदापि रूचि नहीं है| जब तक नाम को सच्ची श्रद्धा और विश्वास के साथ नहीं जपा जायेगा तब तक वास्तिविक आनंद भी प्राप्त नहीं होगा| इंसान सच्चे दिल से, अपने मन से छल कपट को हटा कर, पूर्ण विश्वास के साथ केवल एक बार श्री राम का नाम जपे यकीन मानोगे कि ऐसा आनंद मिलेगा, ऐसा सुख मिलेगा कि इंसान का रोम रोम खिल उठेगा कई बार तो नाम जपते-जपते इन्सान ऐसी अवस्था पर पहुँच जाता है कि इंसान की सुरति हर समय ब्रह्म देश में विचारण करने लगती है| इंसान अपने तन की सुधि भूल जाता है और उसके मन में आठों याम नाम का अमृत बरसना शुरू हो जाता है| सही मायनो में यही सच्चा आनंद है शायरों ने भी कथन किया है कि-

तमन्ना है हर इंसान की, मैं सदा खुश रहूँ |

कोई गम चिंता मुझे ना सताये| हर कोई मुझे प्यार करे ||

लेकिन भुला कर प्रभु के नाम को, यह सुख चैन कैसे पायेगा |

सुख कि इच्छा तभी होगी पूरी, जब मालिक का नाम दिल में बसाएगा ||

 

जिस सच्चे सुख को प्राप्त करने के लिए इंसान रात दिन लग कर तरह- तरह के समान इकट्ठे कर रहा है, सांसारिक धन इकठ्ठा करने के लिए रात दिन उतावला रहता है वह सब यहाँ से जाने के बाद यही का यही धरा रह जाएगा| महापुरुष फरमाते है कि साथ तेरे जायेगा एक केवल नाम ही |

 

जिसको तू अपना समझ रहा वो गर हकीकत है नहीं ||

 

इंसान ने जिस दुनिया को अपना समझ रखा है और जिस दुनिया की बढाई पाने के लिए वह तरह-तरह के यतन करता है वह सब काम आने वाली नहीं है| एक केवल प्रभु का नाम ही जीव के साथ जाने वाला और जीव को सुख प्रदान करने वाला है| इन्सान संसार के झूठे पदार्थो को एकत्रित करके इतना इतराता है, झूठी दुनिया का मान प्राप्त करने के लिए रात दिन यत्न करता है| यह सब करके इंसान यही समझता है मुझसे बढ़कर समझदार इस दुनिया में कोई नहीं है| इन्सान बेशक कितना कुछ इकठ्ठा करले संसार में लेकिन एक मालिक का नाम नहीं जपा तो समझो व्यर्थ ही हीरा जन्म गवां दिया फिर उसे चौरासी के चक्कर में जाना पड़ता है और पीड़ा उठानी पड़ती है| इसलिए अगर कुछ जानने कि इच्छा है तो सच जानने का प्रयत्न करो ऐसी वस्तु को हासिल करो तो अंत में साथ जाने वाली है| कही ऐसा ना हो कि समय हाथ से निकल जाये और फिर पछताना पड़े जैसे कहा भी है कि-

 

आये थे जिस काम को, भूल गए वो बात |

क्या ले मिलिए राम से, जब खाली दोनो हाथ ||

 

कि जो काम करना था वो तो भूल गए और हीरे जन्म को व्यर्थ ही गवां दिया तो समय रहते ही सच को जानना आवश्यक है और सच क्या है इस का वर्णन हमे सद्ग्रंथों में महापुरुषों की वाणियों में मिलता है| परम संत कबीर साहब जी ने तो इतना तक कह दिया कि

 

कबीर आधी साखि यह, कोटि ग्रन्थ करि जान |

नाम सत्त जग झूठ है, सूरत शब्द पहिचान ||

 

अर्थात ये आधी साखि कोटि ग्रंथो के समान मानी है वो आधी साखि क्या है? “नाम सत् जग झूठ है, सूरत शब्द पहचान “ कि एक नाम ही सच्चा है बाकि सब झूठ है एक नाम को छोड़कर सब नश्वर है, नाश होने वाला है| केवल एक मालिक का नाम युगों युगों से चलता आ रहा है और आगे भी युगों युगों तक चलता रहेगा| लेकिन कोई विरला इन्सान ही इस नाम की महिमा को जान पाता है| जिसको पूर्ण सतगुरु की पावन संगति प्राप्त हो जाती है या किसी के पूर्व जन्म की कमाई जीव को नाम से जोड़े रखती है| ऐसे विरले लोग ही अपना संसार में आना सफल करके जाते है| वे हरि का नाम सुमिरन कर यहाँ भी सुख पाते है और जब जाते है तब भी मालिक के धाम में ही उनके चरणों में निवास प्राप्त करते है यही नाम जपना सबसे आवयशक कार्य है| जिस तरह इन्सान तीन समय शरीर को भोजन खिलाता है शरीर को खुराक देता है, ठीक उसी तरह आत्मा की खुराक जोकि मालिक का नाम है, वह देना भी अति आवश्यक है| नाम सुमिरन कर ही आत्मा शांति और सुख प्राप्त करती है और सुमिरन करते- करते ही परमात्मा में लीन हो जाती है| हर जीव के लिये कम से कम एक घंटा नाम सुमिरन के लिए समय निकलना अनिवार्य है| इस घोर कलयुग में नाम ही आधार है, जो जीव को हर मुसीबत में रक्षा करता है| इंसान मुसीबत के समय जगह- जगह अपना समय, पैसा नष्ट करता है| कोई बीमारी लग जाये तो पीड़ा सहन करता है लेकिन इस चीज़ की गारंटी भगवान देते है जो इंसान मेरा भजन सुमिरन नित्य प्रति पूरी श्रद्धा और विश्वास के साथ करेगा उसे कोई दुःख नहीं सताऐगा| उसकी सारी जिम्मेवारी, सारी चिन्ताएं भगवान खुद ले लेते है| अब आप खुद देखे कि अपनी जिम्मेवारी संसार के लोगो को देनी है या उस परमपिता परमात्मा को देनी है जो यहाँ भी हमे सुख प्रदान करने वाले है और आगे भी| इसलिए अन्त में आप सबसे मेरा इतना ही अनुरोध है भगवान ने हमे इतना सुंदर शरीर प्रदान किया उसकी कृपा से हम ये श्वास ले पाते है और जीवन यापन कर पाते है| हमारा ये फ़र्ज़ बनता है कि जब भगवान ने हम पर इतनी कृपा की है, बदले में उनके वचनों को हम अपने जीवन में धारण करे| भगवान सिर्फ यही इस जीव से चाहते है कि वह हरि नाम का सिमरन नित्य प्रति करे और वह कार्य कर के जाये जिसे करने के लिए वह जग मैं आया है| अपनी असली पूंजी मालिक का नाम एकत्रित करके यहाँ से जाए तो सीधा मालिक के चारणों में पहुँचेगा और सच्चा सुख पाएगा| अंत में आप सबका बहुत बहुत धन्यवाद|  

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