Monday, May 11, 2020

भक्त हिम्मतदास जी


भक्त हिम्मतदास जी
भक्त हिम्मतदास जी जोकि बड़े उच्च कोटि के भक्त थे, संत महापुरुषों की सेवा करते और उनका आशीर्वाद प्राप्त करते थे| भक्त हिम्मतदास जी को प्रभु के गुणों का बखान करते हुए कीर्तन करने में विशेष आनंद आता था| पन्ना नगर में श्री युगल किशोर जी के नाम से एक मंदिर था, जहाँ वे प्राय: जाया करते थे| उस मंदिर तक जाने के रास्ते में एक जंगल पड़ता था| एक दिन भक्त हिम्म्तदास जी भगवान की मस्ती में मस्त होकर मंदिर की तरफ जा रहे थे तो जंगल के रास्ते में उन्हें लुटेरे मिल गए| उन लुटेरों ने हिम्म्तदास जी से कहा- रुक जाओ बाबा जी| तो यह सुनकर हिम्म्तदास जी को कोई फर्क नहीं पड़ा वे अपनी मस्ती में मस्त होकर झांझ बजा रहे थे| एक लुटेरे ने आगे बढ़कर उनकी झांझ छीन ली| तो भक्त जी ने पूछा कि आप कौन है? तब उन लुटेरों ने जवाब दिया हम लुटेरे हैं जो कुछ भी तुम्हारे पास है, सब हमें दे दो| अगर जान की सलामती चाहते हो| भक्त जी ने कहा कि मेरे पास तो झांझ है, इसके अतिरिक्त और कुछ भी नहीं है| यह झांझ बजाकर मैं प्रभु के गुण गाता हूँ| एक लुटेरे ने उनकी तलाशी ली, जब कुछ न मिला तो उस लुटेरे ने अपने साथियों से कहा- चलो यहाँ से कोई और शिकार खोजे| झांझ छिन जाने से कीर्तन में बाधा पड़ी, जिससे भक्त जी को दुःख तो बहुत हुआ, परन्तु वे इसको भी प्रभु इच्छा समझ कर पन्ना की तरफ चल दिए| अभी वे कुछ दूर ही पहुँचे थे कि लुटेरे उन्हें जोर-2 से आवाजे लगाने लगे कि बाबा जी अपनी झांझ ले जाओ| हुआ यूं कि जैसे ही लुटेरे झांझ लेकर कुछ दूरी पर पहुँचे उन्हें एक-2 करके दिखना बंद हो गया और वे चिल्लाने लगे| उनमे से एक ने कहा कि ये उसी बाबा जी झांझ छीनने का नतीजा है| झांझ के छिनने का भक्त जी को बहुत दुःख था परन्तु जब उन्होंने लुटेरों के मुख से यह बात सुनी की अपनी झांझ वापिस ले जाओ तो वे भागे -2 उनके पास पँहुचे| लुटेरो ने उन्हें झांझ वापिस करते हुए कहा कि हमसे बड़ी भूल हो गई| हम लोगों को दिखाई देना बंद हो गया है| हमें क्षमा करो बाबा| लगता है आपने हमें श्राप दिया है| तब भक्त जी ने झांझ वापस लेते हुए कहा कि भैया मैंने न तो तुम्हे श्राप दिया है न ही मेरे अंदर ऐसी कोई शक्ति है| हाँ एक बात अवश्य है, मैंने ऐसा सुना है कि प्रभु अपने प्रति किया गया अपराध तो क्षमा कर देते है परन्तु अपने भक्त के प्रति किया गया अपराध क्षमा नहीं करते|
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