संत
मौलाना रूम जी
एक दिन मौलाना रूम जी कही पर कथा वार्ता कर
रहे थे हजारों लोग बैठ कर सुन रहे थे तो वहां से उच्च कोटि के संत शम्स तबरेज जी
का वहाँ से गुजरना हुआ तो उनकी दृष्टि मौलाना जी पर पड़ी उन्होंने ये नहीं सुना कि
ये बोल रहा है उन्होंने ये देखा कि ये बोल कहाँ से रहा है और ये खुद बोल रहा है या
कोई और बोल रहा है आखिर उनके मुख से वचन
निकला है तो हीरा लेकिन कीचड़ में पड़ा है अब शम्स तबरेज जी वहाँ बैठ गए| जब सभ ख़त्म
हो गई तब मौलाना रूम जी अपने घर जाने लगे तो शम्स तबरेज जी भी उनके पीछे -2 चल दिए
जब वे अपने घर पहुँचे तो शम्स तबरेज क्या देखते उनके घर के अंदर पर बड़े -2
कीमती ग्रन्थ पड़े थे| शम्स तबरेज जी ने उन पुस्तकों की तरफ ईशारा
करते हुए मौलाना रूम को कहा कि ये क्या है? तो मौलाना रूम जी बड़े अहंकार से बोले
ये वो है जो तुम नहीं जानते उनका इतना कहना था कि उन ग्रंथों में आग लगने लगी
मौलाना रूप जी डर गए और कहने लगे ये क्या है? तो शम्स तबरेज जी ने कहाँ कि ये वो
है जो तुम नहीं जानते| तो उन्होंने उन ग्रंथों में आग नहीं लगाई उन्होंने आग
मौलाना रूम जी के अहंकार को लगाईं|
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