Monday, May 11, 2020

हजरत निजामुद्दीन जी


संत हजरत निजामुद्दीन
एक बार का वृतांत है कि संत हजरत निजामुद्दीन के पास एक निर्धन व्यक्ति आया| उसने प्रार्थना की कि मैंने लड़की का विवाह करना है परन्तु उसके लिए मेरे पास कुछ नहीं है| कृपा करके मुझे कुछ सहायता दीजिए जिससे मैं यह कार्य कर संकू| तब हजरत निजामुद्दीन ने कहा कि हम तो अपने पास कुछ भी नहीं रखते, लेकिन इतना कर सकते है कि आज जो कुछ भी भेंट में हमे प्राप्त होगा, वे सब आप ले जाना, सयोंगवश उस दिन कोई भी सेवक न आया और न ही कोई भेंट मिली, संध्या के समय हजरत निजामुद्दीन ने कहा – भाई हमारे पास तो केवल पहनने के लिए एक जोड़ी पादुका है, इसे ले जाओ, जो कीमत मिले, उसी से अपना कार्य सिद्ध कर लेना| वह व्यक्ति हजरत निजामुद्दीन की चरण पादुका लेकर चल दिया| मन में यही सोच रहा था कि इस चरण पादुका से मुझे क्या मिलेगा? मार्ग में उसे हजरत निजामुद्दीन का शिष्य अमीर खुसरो मिला, जो कि उनका बड़ा श्रद्धालु और परम शिष्य था, वह कही से कई ऊँटो पर धन लाद कर ला रहा था| अमीर खुसरो को उस व्यक्ति के समीप आने पर कुछ-2 सुगंध आने लगी| तो अमीर खुसरो ने अपने नौकरों से पूछा कि देखो, यह सुगंध कहाँ से आ रही है? नौकरों ने कहा कि हमें और तो कोई सुगंध वाली वस्तु दिखाई नहीं दे रही, वही सामने से वह निर्धन व्यक्ति जा रहा था| उसने नौकरों से कहा- इस व्यक्ति को रोको| पुन: अमीर खुसरो सवारी से उतर कर स्वयं उस व्यक्ति के पास आया| उस समय उसे और भी अधिक सुगंध आई| उसने पूछा कि तेरी बगल में क्या है? उस व्यक्ति ने भयभीत होकर चरण- पादुका निकाल कर दिखाई और कहा कि हजरत साहिब ने यह मुझे स्वयं दी है तथा सारा वृतांत भी कह सुनाया| अमीर खुसरो ने अपने मुर्शिद की चरण पादुका पहचान ली| उस समय उसके दिल में प्रेरणा हुई| उस ने उस व्यक्ति से पूछा कि तू इसके बदले में क्या कीमत लेना चाहता है? वह व्यक्ति कीमत सोच ही रहा था कि कितनी माँगू? इतने में उसके कहने से पहले ही अमीर खुसरो ने कह दिया- तू मेरे ऊँटों पर लदी सारी धन राशि ले जा और मुझे यह चरण –पादुका दे दे| तब उसके कथनानुसार उस व्यक्ति ने चरण पादुका दे दी| अमीर खुसरो ने चरण पादुका को लेकर मस्तक पर लगाया और सिर पर रखकर अपने पीर मुर्शिद की हजूरी में उपस्थित हुआ| मुर्शिद ने पूछा- खुसरो| आपको यह पादुका कहाँ से मिल गई? खुसरो ने मार्ग का सारा वृतांत श्री चरणों में सुनाया किया| तब हजरत निजामुद्दीन ने फरमाया कि अभी भी तुझे ये पादुका बहुत सस्ती मिल गई|  ये है एक भक्त का प्रेम|
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