ईश्वर की प्राप्ति
एक बार एक भक्त ने स्वामी रामानन्द जी से पूछा, मनुष्य ईश्वर की प्राप्ति
कैसे कर सकता है|
उन्होंने उत्तर दिया, " ईश्वर की कृपा द्वारा" अब ईश्वर की कृपा कैसे
प्राप्त की जा सकती है? जिज्ञासु ने पूछा - उन्होंने कहा- "ईश्वर कृपा के लिए शुद्ध ह्रदय से
प्रार्थना करनी होती है|
खुदा कबूल करता है दुआ जो सच्चे दिल से
होती है
मुश्किल ये है की ये बड़ी मुश्किल से होती है
प्रभु सच्चे दिल से की हुई प्रार्थना
को स्वीकार करते हैं लेकिन मुश्किल ये है कि ऐसी प्रार्थना सबकी नही
होती| वास्तव में गुरु कृपा हर समय हमारे अधयात्मिक
प्रयत्नों में हमारे साथ रहती है| इस संसार में सतगुरु मनुष्य के रूप में अवतार लेते हैं| हमें मुक्त करने और मोक्ष का
मार्ग दिखलाने के लिए|
जब मनुष्य ये भावना प्रकट करता है कि, " हे सतगुरु मैं
स्वयं कुछ करने में असमर्थ हूँ|
मैं केवल आपकी कृपा चाहता हूँ|
मैं कुछ भी नही हूँ| आप ही समर्थ है जो
भी मेरा है, सब आपका है| आप सर्वशक्तिमान है|
आपकी आपार कृपा के बदले मेरे पास देने के लिए कुछ भी नही है|" जब भक्त का मन इसी प्रकार की भावनाओं से भरपूर हो जाता है और अहंभाव लेशमात्र भी नही
रहता तब उसे लगता है कि सतगुरु की कृपा उसके अन्दर प्रवेश कर रही है जो सच्चे दिल
से उसकी माँग करता है|
जो भी द्वारा खटखटाने की कोशिश करता है तो
उसके लिए द्वार खुल ही जाते
है | यदि द्वार नही खुलता तो शायद हमारी भक्ति में,
प्रार्थना में, इच्छा में कुछ कमी जरुर होती है| जो भी मनुष्य अपने आपको सतगुरु के
हवाले कर देता है तो सतगुरु उसे नाम के जहाज पर वहाँ ले जाते है जहाँ से वह फिर आवागमन के चक्र में
नही गिरता|
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