Monday, May 11, 2020

श्री बाल्मीकि ऋषि जी


श्री बाल्मीकि ऋषि जी
डाकू रत्नाकर देवर्षि नारद से दीक्षा प्राप्त करके ऋषि बाल्मीकि बन गए थे| रत्नाकर को देवर्षि नारद ने कहा था कि अपने सगे सम्बन्धियों से पता करके आओ कि जिनके लिए वह लूटमार करता है, क्या वह यमराज के न्यायालय में उसके साथ चलेंगे और इन पाप कर्मों की उसे जो सजा मिलेगी, उसके भागी बनेंगे? सभी ने इस कार्य में अपनी असहायता व्यक्त कर दी| इस बात ने उनके जीवन में एक नया मोड़ ला दिया| उसने देवर्षि नारद से भक्ति पथ पर चलने के लिए नाम दीक्षा के लिए याचना की| रत्नाकर अपने गुरुदेव् के आदेशानुसार घंटो भजन ध्यान में बैठने लगे| उन्होंने मालिक का साक्षात्कार किया और उनका नाम ऋषि बाल्मीकि हो गया|
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