अरुणि
की गुरु भक्ति
गुरू
धौम्य का बहुत बडा आश्रम था। आश्रम में कई शिष्य थे। उनमें अरूणि गुरू का सबसे
प्रिय शिष्य था। आश्रम के पास खेती की बहुत ज़मीन थी। खेतों में फसल लहलहा रही थी।
एक दिन शाम को एकाएक घनघोर घटा घिर आई और थोडी देर में तेज वर्षा होने लगी। उस समय
ज्यादातर शिष्य उठ कर चले गए थे। अरूणि गुरूदेव के पास बैठा था। गुरू
धौम्य ने कहा, अरूणि तुम खेतों की तरफ चले जाओ और मेडों की जाँच कर लो। जहाँ
कहीं से पानी बह रहा हो और मेड कमजोर हो तो वहाँ मिट्टी डाल कर ठीक कर देना। अरूणि
चला गया। कई जगह मेड के ऊपर से पानी बह रहा था। उसने मिट्टी डाल कर ठीक
किया। एक जगह मेड में बडा छेद हो गया था। उससे पानी तेजी से बह रहा था। वह उस छेद
को बंद करने के लिये मिट्टी का लौंदा उठा-उठा कर भरने लगा, लेकिन
ज्योंही एक लौंदा रखकर दूसरा लेने आता, पहले
वाला लौंदा भी बह जाता। उसका बार-बार का प्रयास बेकार जा रहा था कि उसे एक उपाय
सूझा। उसने मिट्टी का एक लौंदा उठाया और छेद को बंद करके स्व्यं मेड के सहारे वहीं
लेट गया, जिससे पानी बहना बंद हो गया। रात होने लगी थी। अरूणि लौट कर
आश्रम नहीं आया था, जिसकी वजह से गुरू को चिंता हो रही थी। वे कुछ शिष्यों को लेकर
खेत की तरफ गये। खेत के पास पहुँच कर पुकारा, अरूणि
तुम कहाँ हो। वह बोला,
गुरूवर मैं यहाँ हूँ।
गुरूवर उस जगह गए। उन्होंने देखा कि अरूणि मेड से चिपटा हुआ है। गुरूदेव बोले, वत्स
तुम्हें इस तरह यहाँ पड़े रहने की जरूरत क्या थी| तुम्हें
कुछ हो जाता तो …।
अरूणि बोले, गुरूवर, यदि मैं अपना कर्तव्य अधूरा छोड कर चला आता तो वह गुरू का अपमान होता। जहाँ तक कुछ होने की बात है तो जब तक गुरू का आशिर्वाद शिष्य के सिर पर है तब तक शिष्य को कुछ नहीं होगा। गुरू का दर्जा तो भगवान से बडा है। इस पर महर्षि बोले, वत्स, मैं तुमसे बहुत प्रसन्न हूँ। तुमने आज गुरू-शिष्य के संबधों की अनूठी मिसाल कायम की है जो हमेशा के लिये जनमानस में एक मिसाल बनी रहेगी। तुमने अंतिम परीक्षा पास कर ली है।
अरूणि बोले, गुरूवर, यदि मैं अपना कर्तव्य अधूरा छोड कर चला आता तो वह गुरू का अपमान होता। जहाँ तक कुछ होने की बात है तो जब तक गुरू का आशिर्वाद शिष्य के सिर पर है तब तक शिष्य को कुछ नहीं होगा। गुरू का दर्जा तो भगवान से बडा है। इस पर महर्षि बोले, वत्स, मैं तुमसे बहुत प्रसन्न हूँ। तुमने आज गुरू-शिष्य के संबधों की अनूठी मिसाल कायम की है जो हमेशा के लिये जनमानस में एक मिसाल बनी रहेगी। तुमने अंतिम परीक्षा पास कर ली है।
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