भक्त नापा जी
भक्त
नापा जी महाराज खोसा नामक गांव में रहते थे। वह
भगवत कथा में संतो की खूब सेवा किया करते थे। आजीविका
चलाने के लिए खेती बाड़ी
किया करते थे। नापा जी
जाति से माली थे| वह पूरे दिन संतों की सेवा भजन कीर्तन में व्यतीत कर देते थे और
रात में खेती के काम के लिए जाते थे। जिससे उनकी खेती का
कार्य ठीक से नहीं हो पाता था| दिन में संतों की सेवा करने के कारण तथा समय न मिलने
के कारण उनकी खेती खराब होती गई और आजीविका का साधन भी हाथ से निकलता गया| एक दिन एक बालक नापा जी के पास आया और उनसे कहा कि वह उसे अपने पास रखें वह उनका
खेती का काम कर दिया करेगा नापाजी ने उसे अपने पास रख लिया। वह
नापाजी के खेतों का कार्य संभालता और नापा जी
दिनभर संतों की सेवा करते । एक दिन घर में जब नापा जी पहुँचे तो देखा बालक सो रहा है तो
उन्होंने सोचा कि चलो थका है आज मैं खाली हूं मैं ही खुद का काम जाकर कर लेता हूं
जब वह खेत पर पहुँचे तो उन्होंने देखा कि बालक खेत में सिचाई कर रहा है| उन्हें विश्वास नहीं
हुआ वे वापस भागे- भागे घर आये यहाँ देखा तो बालक सो रहा है वे समझ गए कि प्रभु
हमारे काम को करने के लिए स्वयं बालक के रुप में आए हैं। वह खेत पर
पहुँचे और प्रभु के चरणों को पकड़ लिया और बोले महाराज मैंने आप को पहचान लिया है|
अब जाने नहीं दूंगा जब तक दर्शन नही देते। बालक ने कहा अरे मैं
तो आपके यहाँ काम करने वाला लड़का हूँ आपका सेवक हूं आप क्या कर रहे हो, नापा
जी ने ठाकुर जी को पूरी तरह पकड़ रखा था| अंत में ठाकुर जी को
चतुर्भुज रुप में नापा जी को दर्शन देना पड़ा| नापा जी ने कहा प्रभु आप यह सब
हमारे लिए क्यों कर रहे थे| भगवान ने कहा आप संतों की सेवा करते हैं संतों की सेवा
हमारी सेवा है| यदि आप हमारी सेवा करते हैं तो हमारा भी तो कुछ फर्ज बनता है |
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