Monday, May 11, 2020

बादशाह शाहजहाँ


शाहजहाँ को गुरुनानक देव जी वचन
एक बार बादशाह शाहजहाँ के सामने किसी ने सत्पुरुष श्री गुरु नानक जी के वचन बताए  कि परमात्मा को सबका ध्यान है और सब कार्य उसकी दृष्टि में ही हो रहे हैं और जिससे वो जो चाहता है वैसा कर्म करवाता है| बड़ों से भी बड़ा वह परमात्मा अपनी विस्तृत सृष्टि के जीवों को कार्यो में लगाता है| यदि वह अपनी नज़र उलटी कर ले तो बादशाहों को भी घसियारे जैसा कंगाल बना दे यहाँ तक कि उन्हें द्धार-द्धार माँगने पर भी भीख न मिले| सत्पुरुषों के वचन तो धुर के वचन होते हैं, तीनों कालों में सत्य होते हैं| परन्तु शाहजहाँ उस समय चूँकि राजमद में चूर था, अंत वह इन वचनों का मजाक उड़ाते हुए बोला- बादशाह हो और दर-दर माँगने पर भीख भी न मिले, ऐसा भी कभी हो सकता है? ये भी कोई मानने और विश्वास करने योग्य वचन है| किन्तु इसके कुछ दिनों के उपरान्त जब उसके अपने ही पुत्र औरंगजेब ने उसे बंदी बना लिया और औरंगजेब के सिपाही जब उसे हथकड़ियाँ डालकर आगरे के किले में कैद करने के लिए पैदल ले जा रहे थे, उस समय मार्ग में यद्यपि उसे प्यास बहुत सता रही थी| परन्तु बार-बार माँगने पर भी उसे किसी ने एक घूंट पानी न दिया उस समय उसे श्री गुरु नानक देव जी के वचन याद आए और उसे समझ आई| कि सत्पुरुषों के वचनो में किस कदर सच्चाई है, सृष्टि का मालिक क्या कर सकता है|
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