Monday, May 11, 2020

परम संत कनक दास जी


संत कनक दास जी
दक्षिण भारत में एक बहुत महान संत हुए है संत कन्नक दास जी कहते है कन्नक दास जी जब अपने गुरु के पास शिक्षा लेने गए तो उन्होंने गुरु की सेवा से उनका मन जीत लिया इनके गुरु का  भी इनके प्रति विशेष प्रेम थे इसी बात को लेकर गुरु जी के अन्य शिष्य कनक जी से जलते थे| एक दिन कनक जी के गुरु व्यासरायल ने एक लीला रचाई और अपने सभी शिष्यों को को बुला कर एक केला दिया और कहा की आप सभी उन्हें खा लेना, परन्तु स्मरण रहे के इसे ऐसी जगह पर खाए की जहाँ कोई आपको देख न सके| अब कोई शिष्य चद्दर में छुप कर तो कोई चारपाई के नीचे जाकर कोई बिस्तर में तो कोई अँधेरे में जाके फल खा आ गए, पर कनक दास जी बिना खाए  वापस आ गए और गुरु से माफ़ी मांगी और कहा की मैं ये केला नहीं खा पाया क्योंकि मुझे कोई ऐसी जगह ही नहीं मिली जहाँ मुझे आप न नजर आये हो मुझे हर जगह पैर आप ही ऐसे नजर आये जैसे मेरे सामने अब नजर आ रहे हो| कनक जी का ये उत्तर सुन कर सभी अन्य शिष्य भी हैरान रह गए कि सही मायनों में कनक जी प्रेम अपने सतगुरु के चरणों में अटूट है|
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