गेहूँ की जगह जौ
कहते हैं लुकमान
जहाँ पर काम करता था, वह मालिक सदा अहंकार व क्रोध से भरा रहता था| धन के अतिरिक्त
उसे कुछ नहीं सूझता था| लुकमान बड़ा ही विचारवान था| वह सदा ही विचार करता रहता था
कि मालिक को सच्चे रास्ते पर कैसे लगाया जाये| मालिक ने लुकमान के नीचे कुछ नौकर
रखे जो कि काम करवाने के लिए नियुक्त किये थे, अब लुकमान के मन में मालिक को सही
मार्ग पर लाने के लिए युक्ति सूझी| यद्यपि इस कार्य में बड़ा जोखिम था| वह जानता था
कि यदि यह पासा सीधा न पड़ा तो उसकी खैर नहीं लेकिन फिर भी उसने यह जोखिम लिया| जब
गेहूँ बोने का समय आया तो लुकमान के मालिक ने उसे बुलाकर कहा समय आ गया है, खेतों
में अपने आदमी लगाकर बीज गिरवा दो| लुकमान खेतों में गया और अपने आदमियों को जौ का
बीज देते हुए कहा कि इन्हें खेतों में बो दो| तब कुछ लोगों ने कहा कि तुम ये क्या
कर रहे हो? गेहूँ की जगह जौ का बीज डलवा रहे हो| यदि मालिक को पता चल गया तो वह
तुम्हारी खाल खिंचवा लेगा| लेकिन लुकमान ने उन्हें कहा कि तुम इस बात की चिंता न
करो| तब लुकमान की जिद पर आदमियों ने जौ के बीज बो दिए| धीरे -2 ये बात मालिक तक
पहुँची कि लुकमान ने गेहूँ की जगह जौ के बीज बो दिए है| तब उसने खेतों पर जाकर
निरक्षण किया तो बात को सत्य पाया| उसने क्रोध में लुकमान को बुलवाया, और लुकमान
से पूछा कि क्या तुमने हमारे आदेश का पालन किया? तो लुकमान ने उत्तर दिया जी हाँ
महाशय| कुछ ही दिनों में गेहूँ की फसल तैयार हो जायेगी| तब मालिक और क्रोधित होने
लगा कि खेतों में गेहूँ की बजाय जौ के पौधे उगे हुए है फिर गेहूँ की फसल कैसे
तैयार होगी? यह सुनते ही लुकमान बोला कि मालिक जब जौ का बीज बोकर जौ की फसल ही
मिलेगी तो आप जो दिन-रात पापकर्म करने मे लगे है तो आपको क्या लगता है अनुचित
कार्य करने पर आपके साथ अच्छा व्यव्हार होगा? यदि अनुचित कर्म करके भी आप परलोक
में शुभ फल प्राप्त करने की आशा रखते है तो फिर जौ बोकर गेहूँ की फसल प्राप्त करने
की आशा रखकर मैं कैसे मूर्ख हुआ? यह शब्द उस मालिक के दिल में उतर गए| कुछ देर तक
चुपचाप वह सोचता रहा फिर उसने लुकमान से कहा कि तुमने मेरी आँखे खोल दी| जैसा
इंसान कर्म करेगा, वैसा ही उसे भुगतना पड़ेगा|
****
लुकमान
के बुत
लुकमान एक प्रसिद्ध
हकीम था| कहते हैं कि उसको अपनी मौत का पता चल गया था, कि उसकी मृत्यु कब आनी है?
तो उसने एक तरकीब सोची| उसने अपनी शक्ल और आकार के कई सारे बुत तैयार करे जो कि
हू- ब-हू लुकमान की तरह लगते थे| जब यमराज के दूत लुकमान को लेने आये तो लुकमान
सांसो को रोक कर, उन्हीं बुतों के बीच में खड़ा हो गया| यमराज के दूतों को समझ में
ना आया कि इतने सारों में से लुकमान कौन है? वे वापिस यमराज के पास गए और यमराज को
सारी घटना बताई| यमराज ने उन्हें एक युक्ति बताई| वे दूत वापिस उन्ही बुतों के पास
गए और वह जाकर बोलने लगे कि कितनी सुंदर कलाकारी है, ये तो हू-ब-हू एक जैसे लगते
है| परन्तु इनमे एक कमी रह गई, तो लुकमान ने जैसे ही कमी के बारे में सुना वो बोल
उठा कि क्या कमी रह गई? जैसे ही उसने बोला तो दूतों ने कहा कि कमी ये रह गई कि तुम
काल से नहीं बच पाए और न ही कोई बच पाया है|
****
No comments:
Post a Comment